Thursday, January 17, 2008

मार्केटिंग - कॉमेडी कथाकथन भाग-२/४ पोस्ट १२

Previous Joke Next Joke

.

एक जगह रास्ते के किनारे एक ज्योतिषी बैठा था. वहां " हमारा पत्थर पहनीए और अपना भविष्य बदलीए'. ऐसा बोर्ड लगाया हूवा था. मेरी पत्नी ने मुझसे उसके पास चलने का आग्रह किया. आग्रह कैसा हठ किया. असल में वह हठ के सुनहरे मुलायम कपडेमे लपेटी हूई मीठी धमकी थी.

मै उसे समझा बुझाने की कोशीश करने लगा. यहां समझा बुझाने के बजाय सिर्फ बुझाना ज्यादा तर्कसंगत लगता है1 " देखो जी ... वह रस्तेपर बैठनेवाला ज्योतिषी ... पहले तो भविष्य बदलने की जरुरत उसको खुद को है ... खुद अपना भविष्य बदल नही सकता वह अपना भविष्य क्या बदलेगा..1 '

" हां ... तुम्हारे होते हूए तो अपना भविष्य बदलने से रहा' वह तनकर बोली.

आगे वह कुछ नही बोली. वैसे इतना कुछ बोलने के बाद आगे बोलने का और क्या बचा था शायद उसने अपना हठ छोड दिया था या फिर उसे मेरी बात नही जची थी. सच्चाई घर जाकर ही पता चलनी थी.

फिर हम बस स्टॉप चले गए. बेंचपर बैठकर हम सिटी बस की राह देखने लगे. एक लंगडा, अंधा भिकारी गाना गाकर पैसे मांग रहा था. सबको उसपर दया आने लगी. बहुत लोगोंने उसे पैसे दिए इसलिए मैने भी दिए. और मैने दीए इसलिये हमारे बाजूवालेने भी दिए. नेबर टेडंसी1 पडोसीने गाडी ली ना फिर मैभी लेता हू ऐसे. उसके लिये भलेही कर्जमें डूबने नौबत क्योंना आये. थोडी देर में एक और भिखारी "मेरी मां बिमार है' कहते हूए हाथ फैलाने लगा. उसको किसीनेभी पैसे नही दिए इसलिए मैनेभी नही दिए. और मैने नही दिये इसलिये हमारे बाजुवालेने भी नही दिये वह जाता नही की उसके पिछे वे तालियां बजाने वाले आ गए .. तृतीय पंथी उनको पैसे ना देने की किसकी हिम्मत. सब लोगोंने चुपचाप उसे पैसे दे दिए. नही दोगे तो सिधा जेब मे हाथ डालकर पैसे लेने की उनकी मजाल. वैसे पैसे निकालने के लिए वे सामनेवाला आदमी देखकर अलग अलग नुस्खे अपनाते है.

" ए चिकने ...दे ना' किसीके गाल को हाथ लगायेंगे. या फिर " ए भिडू ...दे ना' कहकर कही और हाथ लगायेंगे.

" यहां अगर जादा देर बैठे तो थोडी देर बाद कही हमें भीख मांगने की नौबत ना आ जाए' मैने मेरे पत्नीसे उसके सामने हाथ फैलाने की चेष्टा करते हूए मजाक में कहां.

ऐसे मजाक की हवा निकालकर उसे कैसे भद्दा बनाना तो कोई मेरे बिवीसे सिखे... अपने गंभीर चेहरे को और गंभीर बनाते हूए झट से उसने अपने पर्स से अठन्नी निकाली और सब बैठे हूए लोगोंके सामने मेरे फैलाए हूए हाथपर थमा दी.

भिखारीयोंसे बचनेके लिए मै बगल के एक स्टॉल पर गया. वहां सामने एक शायद किसी खाने के चीज का पाकीट लटका हूवा था. उस पर लिखा हूवा था "अब पहले से बढिया स्वाद में'. स्वाद और वह भी बढीयां. मेरे मुंह मे पाणी आ गया . मैने पुछा "क्या है?'. उसने रुखे स्वर में कहां "कुत्ते का बिस्कीट' मेरे मुंह का पाणी उल्टे पांव लौट गया . कुत्ते का बिस्कुट ... अब पहले से बढिया स्वाद में. अब इसके पहले के स्वाद में और अब के स्वाद में फर्क है या नही ये देखनेके लिये या तो आदमी को कुत्ता बनना पडेगा. ... या फिर कुत्तेको पढना लिखना सिखना पडेगा

" अजी सुनीये ... गाडी आ गई... नही तो हमेशा की तरह...' श्रीमतीजीकी आवाज आया. उसने आगे भी कुछ कहां.. वह मुझे सुनाई दिया नही ऐसा नही... बल्की वह मैने जानबुझकर सुना नही ... हमेशा की तरह... आदत के अनुसार.

.... to be contd

Labels : aha jokes, clean jokes, funny jokes, funny photo, funny photos, games, games and jokes, Haryanavi Humour, Hilarious jokes, india humor, kids jokes, laugh and smile, marriage jokes, political jokes

.

Previous Joke Next Joke

0 comments:

POPULAR POSTS ======>

Custom Search

इस साईट पर आपभी चुटकुले भेज सकते है

  Hindi Jokes Feed

Enter your email address to SUBSCRIBE to Hindi Jokes:

Social Network

आप इस अंतर्जाल पर आनेवाले

वे आगंतुक है

Marathi Subscribers

Hindi Subscribers

About Hindi

Hindi is the name given to an Indo-Aryan language, or a dialect continuum of languages, spoken in northern and central India (the "Hindi belt")Native speakers of Hindi dialects between them account for 41% of the Indian population (2001 Indian census). That is the reason because of which the entertainment industry in India mainly use Hindi. And the idustry which is also called as bollywood is the second largest industry producing movies in the world. As defined in the Constitution, Hindi is the official language of India and is one of the 22 scheduled languages specified in the Eighth Schedule to the Constitution. Official Hindi is often described as Modern Standard Hindi, which is used, along with English, for administration of the central government. Standard Hindi is a sanskritised register derived from the khari boli dialect. Urdu is a different, persianised, register of the same dialect. Taken together, these registers are historically also known as Hindustani.