Wednesday, January 30, 2008

जोक्स - अगर सरदार सरकार चला ए तो? (पोस्ट २०)

Previous Joke Next Joke

.

....

सरकार और सरदारमे क्या फर्क होता है?

सरकार को चलाना पडता है और सरदार को रोकना पडता है...

अगर सरदार सरकार चलाए तो?

सरकार तो कोई और चलाता है... और उसे लगता है की वही चला रहा है...


Labels : chittha jagat, chitthavishwa, free sms, funny sms messages, hindi blog, hindi chitta, Hindi jokes blog, hindi sms, hindi sms jokes, joke blog, jokes blog, jokes collection, jokes duniya

.

Previous Joke Next Joke

Monday, January 28, 2008

जोक्स - सरदार और सिटी बस (पोस्ट १९ )

Previous Joke Next Joke

.

एक सरदारजी और दुसरा एक आदमी सिटी बस स्टॉपपर बस का इंतजार कर रहे थे. इतनेमे एक बस आगई वे दोनो दौडते हूए जल्दी जल्दी बसमें बैठ गए. दुसरे आदमीने टीकटवालेसे पुछा, " क्या यह बस मुझे अंधेरी स्टशन ले जा एगी'

कंडक्टरने बोला " नही'

तो वह आदमी उतर गया.

फिर सरदारजीने कंडक्टरसे पुछा, " अच्छा यह बस मुझे तो ले जाएगी अंधेरी स्टेशन?'



Labels : best chutkule, best chutkule sangraha, best jokes collections, best santa banta collection, best sardar jokes collection, chutkule collection, chutkule sangraha, ejokes, hindi jokes collection

.

Previous Joke Next Joke

Friday, January 25, 2008

जोक्स - जब सरदारको लॉटरी लगी (पोस्ट १८ )

Previous Joke Next Joke

.

एक सरदारजीको 1 करोड की लॉटरी लग गयी. वह पैसे लेनेके लिए लॉटरी ऑफिसमें गया. उन लोगोंने उससे एक फॉर्म भरवाया और कहा " अब 15 दिन बाद आवो और अपने पैसे ले जाओ '

सरदार - " पंधरा दिन बाद क्यो? 1 करोड मुझे अभी चाहिए '

लॉटरी ऑफिसर - " ऐसे नही होता साहब ... हे तुम्हारा फॉर्म उपर जाएगा और पंधरा दिन बाद पैसे आएंगे '

सरदार - " ऐसा कैसे... मुझे 1 करोड की लॉटरी लगी है ... मुझे मेरे पैसे अभी चाहिए'

बहुत देर तक लॉटरी ऑफिसर और उसकी कहा सुनी होती रही आखीर गुस्सेसे लॉटरी ऑफिसर बोला -

" आपको सिधे तरह से कहा समझमें नही आता... अब एक पैसा नही मिलेगा... पंधरा दिन बाद आवो और अपना एक करोड ले जाओ'

Labels : aardar, dardar, eardar, saedar, safdar, sagdar, sarcar, sardar joke, sardqr, sardsr, sardzr, sarear, sarfar, sarsar, satdar, sqrdar, sradar, ssrdar, szrdar, wardar

सरदारजीने लॉटरीका टिकट उसके तरफ गुस्सेसे फेंकते हूए कहां, " ऐसा है क्या तो ये लो तुम्हारा लॉटरीका टिकट और मेरे दस रुपए अभी के अभी वापस करो'

.

Previous Joke Next Joke

Wednesday, January 23, 2008

कॉमेडी कार्टून - टाटा नेनो के साइड इफेक्ट्स

Previous Joke Next Joke

.









COURTESY : KIRTISH BHATT

Labels : car humor, car jokes, cheapest automobile, cheapest car, comedy cartoon, comedy cartoons, hindi jokes, hindi literature, hindi novel, humor, India car, India literature, janta car, tata, Tata nano

.

Previous Joke Next Joke

जोक्स - सरदारजीकी ऑर्डर पोस्ट १७

Previous Joke Next Joke

.

एक सरदारजी एक लायब्ररीमें गया. सौकी नोट लायब्ररीयनके टेबल पर फेंकते हूए जोरसे बोला. " एक मसाला दोसा, दो वडापाव और एक इडली चटनी दो... पॅक करके... जल्दी"

लायब्ररीयन अचंभेसे सरदारजी तरफ देखते हूए बोला " साहब यह लायब्ररी है '

सरदारजीने लायब्ररीमे एक नजर दौडाई और लायब्ररीयन के कानके पास जाकर धीमे स्वरमें बोला - " एक मसाला दोसा, दो वडापाव और एक इडली चटनी दो... पॅक करके..., जल्दी"



Labels : baten, chatpate, chatpati, chutkule, chutkule unlimited, Hansi, hansi ka badshaha, hindi chutkule, hindi jokes, Hindustani jokes, jokes, jokes unlimited, laugh, laughter, thahaka, thahake, vinod

.

Previous Joke Next Joke

Tuesday, January 22, 2008

जोक - सरदारजीके के लडके का सवाल (पोस्ट १६)

Previous Joke Next Joke

.

एक सरदारजी अपना 4 साल का लडका और बिवीके साथ रेल्वेमें सफर कर रहा था. सरदारजी को दो बर्थ मिले थे. एक उपर और एक निचे. सफर करते करते रात के दस बजने को आए. सोनेका वक्त हो गया तो वे सोनेकी तैयारी करने लगे. इतनेमें लडकेने सरदारजीसे से पुछा, "" पपा आप कहां मम्मीके पास सो रहे है क्या?'' सरदारजी ने बाकी लोगोंकी नजरे बचाते हूए लडके के सवालको अनसुना कर दिया. लेकिन वह अपने बाप को ऐसे ही थोडी छोडने वाला था. उसने रट ही लगाई "" पपा आप मम्मीके पास सो रहे है क्या?''. आखीर मे सरदारजीने अपने निचेके बर्थपर अपने बेटेको लेकर कहां, "" बेटे हम दोनो यहां निचे सोएंगे'' तो लडकेने मासुमियतसे पुछा,"" फिर मम्मीके पास कौन सोएगा?''


Labels : bharat jokes, clean jokes, comedy, daily joke, Daily Jokes, fun, funny jokes, hindi jokes, Hindustan jokes, humor, jokes from India, jokes India, jokes unlimited, laughter, new joke, new jokes

.

Previous Joke Next Joke

Saturday, January 19, 2008

मार्केटिंग - कॉमेडी कथाकथन भाग-४/४ पोस्ट १४

Previous Joke Next Joke

.

उस दुकान से बाहर निकलते वक्त बाहर सामने एक जुते की दुकान दिखी. वहां बोर्ड लगा था "एक के उपर एक फ्री' . अब दायें जुते के उपर बाया जूता फ्री ... या फिर बाये जूते के उपर दाया जुता फ्रि... या फिर एक पेअर के साथ दूसरी पेअर फ्री...ये उस दुकान मालिक को पुछने की मेरी प्रबल इच्छा हूई. लेकिन अभी अभी आये ताजा अनुभवसे मेरी उस दुकान में जानेकी हिम्मत नही बनी.

रस्तेसे जाते हूए अपनी झेंप छीपाने के लिये उस छाते को कभी जेबमें तो कभी कॉलर मे लटकाने की कोशीश करने लगा. गले मे लटकाते हूए एक विचार मेरे मन मे आया ... अरे यह तो जबरदस्ती गले पडा हूवा छाता है इसको और गले मे लटकाने की क्या जरुरत.

अनायास ही एक पतली गलीमें मेरा ध्यान गया. वहां कोने मे उस दिन मिला अंधा, लंगडा भिखारी मस्त खडा होकर सिगार पीता हूवा दिखाई दिया. इसका मतलब वह लंगडा नही था और शायद अंधा भी नही था. मुझे तो विश्वास ही नही हो रहा था. उसने हम सबको उल्लू बनाया था. उल्लू सी सुरत लेकर मै थोडा और आगे निकल गया . वहां रस्तेके किनारे लोगोंकी भीड जमा हूई थी. कभी कभी भीड ऐसे ही जमा हो जाती है. दो लोग जमा हो जाते है. वे दो क्यों जमा हूए ये देखने के लिये और तिन जाते है...और तिन के पिछे और छे... ऐसे मै भी भीड मे घुस गया... देखता हू तो उस दिन मिला दुसरा भिखारी जो "मेरी मां बिमार है' कहकर भिख मांग रहा था .. वह किसी वृध्द महिला का सर अपने गोद में लेकर जोर जोर से रो रहा था. वह महिला मर गई थी ... शायद उसकी मां थी. उस दिन कितनी विवशता से पैसे मांग रहा था बेचारा. उसको कोई समझ नही पाया था ... या फिर वह अपनी जरुरत की ठीक ढंग से मार्केटिंग नही कर पाया था.

इतने मे वह दुसरा झुठा लंगडा अंधा भिखारी लंगडता हूवा वहां आया. उसकी मौके की नजाकत को पहचानने की काबीलीयत तो देखो. झट से उसने एक कॅप उलटी की और लडखडाता हूवा " उसकी मां को जलाने को पैसे दो' करके भीख मांगने लगा ... ही इज अ परफेक्ट मार्केटींग मॅन ... यहां अगर कोई मार्केटिंग के लोग बैठे हो तो माफ कर देना भाई.

मै और मेरी बीवी मार्केटिंग निपटाकर घर लौट रहे थे. उस भिखारी की मां को मरे हूए 7 - 8 दिन हो गए होंगे. तो भी वह चित्र मेरी आंखो के सामनेसे हटते नही हट रहा था. उस झुठे लंगडे अंधे भिखारी ने सबको बेवकुफ बनाया था. जिसे असली जरुरत उसको किसीने भी पैसे नही दिए थे. आज इस भडकीले ऍड्वर्टाइज, भडकिले मार्केटिंग के युग में क्या सचमुछ अपनी समझ खत्म होती जा रही है. मै अपनी सोच में डूबा चला जा रहा था.

" वह कॉफी सेट बहुत ही सुंदर था है न?' मेरी बिवीने मेरी विचारोंकी श्रुंखला को तोडा.

मैभी अपने आप को नॉर्मल बतानेके प्रयास मे मजाक पर उतर आया.

" हां बहुत ही सुंदर था ... लेकिन एक चीज उस कॉफी सेट की सुंदरता बिगाड रही थी...' मैने कहा.

" कौनसी?' मेरी बिवीने पुछा.

" उसपर लगा हुवा प्राईज टॅग' मैने कहा.

थोडी देर अंधेरे मे हम चूपचाप ही चलते रहे.

" उधर देखो ... उधर गलीमें' मेरी पत्नी एक गली की ओर निर्देश करते हूवे बोली.

मैने उत्सुकतावश उस गली मे देखा. जहां उस दिन वह झूठा लंगडा भिखारी मजेसे सिगार पी रहा था. आज वहां दो लोग थे. वह झूठा लंगडा अंधा भिखारी और दूसरा जिसकी मां मरी थी वह. दोनो मजे से मस्त होकर सिगार पी रहे थे. जिसकी मां मर गई थी वह एक हाथ से सिगार पी रहा था और दूसरे हाथ से किसी राजा की तरह पैसे गीन रहा था

.... शायद वह मार्केटिंग सीख गया था.
--- The end---

-- कृपया इस कहानी के बारेमे आपनी प्रतिक्रिया लिखे --
You can Email this Story to your friends


Labels : comedy bollywood, comedy film, comedy movie, comedy photos, comedy songs, comedy video, comedy world, funny audio, funny images, funny photos, funny video, humor, humor world, laughter challenge

.

Previous Joke Next Joke

Friday, January 18, 2008

मार्केटिंग - कॉमेडी कथाकथन भाग-३ पोस्ट १३

Previous Joke Next Joke

.

आज ऑफिस जाने के लिए घरसे थोडा जल्दीही बाहर निकला. लेकीन एक आफत से छुटकारा पाओ तो वह दुसरा रुप अख्तीयार लेती है ... इसका मुझे थोडीही देरमें साक्षात्कार हूवा. बस आने के लिए आधा घंटा बाकी था. अब क्या किया जाए? सोचते सोचते याद आगया ...

" टाईम पास करने के लिए मार्केटिंगसे अच्छा दुसरा कोई तरीका नही ... कुछ खरीदने की जरुरत नही ... सिर्फ पूछ ताछ करते रहो ' किसी प्रसिध्द लेखक ने एक किताब मे लिख रखा है.

फिर क्या अगल बगल में देखा. बिना कुछ सोचे मै एक दुकान मे घुस गया. दुकानमालीक ने बडी मुस्कुराहट के साथ मेरा स्वागत किया. वहां लटकी हूई चिजे मै देखने लगा. लेकिन बहुत देर से सिर्फ मै चीजे निहार रहा हू ये देखकर उस दुकानमालीक की मुस्कुराहट ने अपना उग्र रुप अख्तीयार लिया.

" क्या चाहिये साब?' उसने पुछा.

फिरभी मै उसकी तरफ ध्यान नही दे रहा हू यह देखकर वह बोला " जल्दी बोलो साब ... सुबह सुबह टाईम खोटा मत करो'.

अब पाणी सर से उपर नही जाना चाहिए इसलिये मैने वहां लटके एक छातेका सहारा लिया.

" कितनेका है ?' मैने उस छाते को छूकर पुछा.

" दो सौ रुपए ...' उसने कहा

मैने अब छाता हाथ में लेकर निहारना शुरु किया. दुकान मालीक अंदर चला गया और उसके जगह उसका नौकर आकर खडा होगया.

मैने उस नौकर से पुछा " इसमें वे अलग-अलग रंग के होते है ना?'

कुछ ना बोलते हूए वह स्वयंचलीत खिलौने जैसा अंदर गया और चार पांच रंग के छाते ले आया.

मैने कहा "लेकिन इसपर सफेद रंग का डिजाईन भी होता है?'

" हां होता है ... लेकिन हमारे पास का वह माल खतम हो गया है' नौकरने कहा.

मैने चैन की सांस ली. चलो यहांसे खिसकने का यह अच्छा बहाना है.

दुकान से जाने के लिये पलटा तो अंदरसे दुकान मालीक की आवाज आई " क्यों क्या हूवा?'

मैने कहा, " मुझे नीले कलर का ... उसपर सफेद डिजाईनवाला छाता चाहिए था... लेकिन आपके यहां नहीं है शायद'

" कौन बोलता है नही है...' वह नौकर पे चिल्लाया. लेकिन नौकर वहां नही था. वह शायद अंदर गया था.

उसने नौकर को आवाज दिया, " टॉमी...'

पता नही इतने देरमे नौकर कहां गायब हो गया था.

उसने गुस्से से नौकर को आवाज दिया " कहा मर गया ... टॉमी...'

गलीमें घुमता हुवा एक आवारा कुत्ता दौडते हूये वहां आगया.

कुत्ते को देखकर तो दुकान मालीकको और गुस्सा आगया.

उसने वहां बैठे हूवे दूसरे एक लडके को पास बुलाया. शायद वह उसका नया ट्रेनी नौकर था.

" बगल के दूकानसे ब्लू कलरके और सफेद डिजाईनवाले चार पाच पीस लेके आना ... जल्दी' मालीकने आदेश दिया. वह लडका हिंन्दी मे शायद थोडा कच्चा था. इसका ज्ञान हमें थोडी ही देर में हूवा. उसको दूकान मालीकने जो भी कहा बराबर समझमें नही आया. लेकिन गुस्साये हूवे दूकान मालीकसे पुछनेकी उसकी हिम्मत नही बनी. वह भागते हूए वहांसे दो चार दूकान छोडके चला गया. उसको वहां एक सलून की दूकान दिखाई दी. उसने अपना दिमाग लगाया " बगल की दूकान यानी... बगल साफ करने की सलून की दूकान. उसको डाउट आया भी की यहां छाते कैसे होंगे. लेकिन मालिकने कहां तो जरुर होंगे. वह अंदर चला गया. अब उसने सलूनवालेसे छाते मांगने के बाद क्या हूवा होगा इसकी कल्पना ना करना ही अच्छा है. यह सब कहानी नौकरने वापस आकर जब अपना दाया गाल सहलाते हूए हमें बताई तब हमें मालूम पडी . इतनेमें दौडते हूवे वह पहलावाला नौकर वहां आगया.

" ... कहा मर गया था कुत्ते ...'

इतनी देर से जो दुकान मालीक को बडी आशा से निहार रहा था वह कुत्ता ... दूम दबाकर भाग गया.

" वो शर्माजीके दुकानसे ब्लू कलर के और सफेद डिजाईनवाले चार पांच पिस लेके आ ...' कहते हूवे मालीकने उसे दौडाया. नौकर दौडता हूवा चला गया. मै अब वहां से खिसकनेका दूसरा बहाना ढूंढने लगा. मैने कहा, " अगर टाईम लगता है तो रहने दो .. मै बादमे कभी आउंगा...वैसेभी बारीश को अभी बहुत टाईम है'

" टाईम कायका साब ... दो मिनट का काम है' उसने लगभग मेरी कलाई पकडते हूवे कहा. अब तो भागनेकाभी चांन्स नही था. वह नौकर दौडते हूये छाते लेकर आया. उसने सब छाते मेरे सामने रखे टेबलपर पटके. मुझे यकिन हैकी उसने पटकते वक्त उस टेबल को जरुर मेरा सर समझा होगा... और छातोंके बंडल को उस दुकान मालीक का सर. उसमें से एक लेकर मैने पुछा " ये कितने का है'

उसने वह छाता उलट पुलटकर देखा. एक जगह कुछ तो लिखा हूवा था. उसके साथ मै भी पढने की कोशीश करने लगा. एक जगह कुछ 1625 ऐसा लिखा हूवा देखकर तो मेरी धडकन ही तेज होगई.

" ढाईसौ रुपए..' दुकान मालिकने झट से कहां.

मै गौर करके देखने लगा की ढाईसौ कहां लिखा है. ढाईसौ कही भी नही लिखा था. फिर मै मन ही मन 1625 को 2 से 3 से 4 से डीव्हाईड करने की कोशीश करने लगा . जितनी मुझे आती थी उतनी सारी गणीती प्रक्रीयायें मैने 1625 पर करके देखी . लेकिन किसी भी सुरतमें ढाईसौ आने का नाम नही ले रहा था. शायद मेराही णीत कच्चा हो. इतनेमें एक दुसरे कस्टमर से दुकान मालीक का ध्यान बंट गया तो मै उस छाते को वहां वैसा ही रखकर वहांसे खिसकने लगा. पिछे से दुकान मालीककी आवाज आई "अब क्या हूवा?'

मैने जाते जाते पलटकर कहा " महंगा है'

" अरे तो आप बोलीये ना आपको कितने में चाहिये ' उसने कहां.

" जाने दो .. मुझे लेना ही नही' मेरे मुंह से निकल गया.

ये सुनते ही दुकान मालीक आग बबुला हो गया. वह गुस्से से बोला " अरे ऐसे कैसे लेने का नही...

... इतनी देर से हमारा टाईम खाया ... और अब बोलता है लेने का नही... इस दुकान को क्या बगीचा समझ रखा है ... बैठे तो बैठे नही तो चले गए.

मैने फिर अपने आपको संभालते हूए कहा "लेकिन बहुत महंगा है'

" तो तुम बोलो ना कितने मे चाहिए... देखुतो तुम्हारी हैसीयत क्या है?' वह "आप' से "तुम' पर आ गया था.

मैने डरते हूए आजूबाजू देखा. आखिर इज्जत का और हैसीयत का सवाल था.

मैने धिमेसे कहा " पचत्तर मे दो'

बुरासा मुंह बनाकर वह बोला "पचत्तर... रुपए या पैसे'

" पचत्तर रुपए' मेरे गलेसे अटकती हूई आवाज आई. वह गुस्सेसे सब छाते बटोरने लगा. वह आगे कुछ कहकर अपना और अपमान ना कर दे इसलिये मै जाने के लिए मुडा.

" ए रुक... जाता किधर है ... ' वह तुच्छतासे बोला.

" ये ले ... सुबह सुबह बहुनीका टाईम है इसलिए... नही तो पचत्तर रुपएमें इसका डंडा भी नही आता ... वैसे भी हम सुबह आये भिखारी को भी तो खाली जाने नही देते...' ऐसा कहते हूए उसने वह छाता लगभग मेरी ओर फेंक दिया. मैने क्रिकेटर की चपलता से उस छाते को कॅच किया. कॅच भी मैने ही किया और आऊट भी मै ही हुवा था चुपचाप 75 रुपए निकालकर दुकान मालिकके हाथ में थमा दिए और अपने मस्तक का पसीना पोछते हूए दुकान से बाहर निकला. असलमें पसीना पोंछनेसे अपने चेहरेके भाव छिपानेकी जरुरत मुझे ज्यादा महसुस हूई थी. ऍग्रेसीव मार्केटिंग किसे कहते है वह आज मुझे अच्छी तरह से समझ में आया था.

... last part will be posted tomarrow.

Labels : comedy bollywood, comedy film, comedy movie, comedy photos, comedy songs, comedy video, comedy world, funny audio, funny images, funny photos, funny video, humor, humor world, laughter challenge

.

Previous Joke Next Joke

Thursday, January 17, 2008

मार्केटिंग - कॉमेडी कथाकथन भाग-२/४ पोस्ट १२

Previous Joke Next Joke

.

एक जगह रास्ते के किनारे एक ज्योतिषी बैठा था. वहां " हमारा पत्थर पहनीए और अपना भविष्य बदलीए'. ऐसा बोर्ड लगाया हूवा था. मेरी पत्नी ने मुझसे उसके पास चलने का आग्रह किया. आग्रह कैसा हठ किया. असल में वह हठ के सुनहरे मुलायम कपडेमे लपेटी हूई मीठी धमकी थी.

मै उसे समझा बुझाने की कोशीश करने लगा. यहां समझा बुझाने के बजाय सिर्फ बुझाना ज्यादा तर्कसंगत लगता है1 " देखो जी ... वह रस्तेपर बैठनेवाला ज्योतिषी ... पहले तो भविष्य बदलने की जरुरत उसको खुद को है ... खुद अपना भविष्य बदल नही सकता वह अपना भविष्य क्या बदलेगा..1 '

" हां ... तुम्हारे होते हूए तो अपना भविष्य बदलने से रहा' वह तनकर बोली.

आगे वह कुछ नही बोली. वैसे इतना कुछ बोलने के बाद आगे बोलने का और क्या बचा था शायद उसने अपना हठ छोड दिया था या फिर उसे मेरी बात नही जची थी. सच्चाई घर जाकर ही पता चलनी थी.

फिर हम बस स्टॉप चले गए. बेंचपर बैठकर हम सिटी बस की राह देखने लगे. एक लंगडा, अंधा भिकारी गाना गाकर पैसे मांग रहा था. सबको उसपर दया आने लगी. बहुत लोगोंने उसे पैसे दिए इसलिए मैने भी दिए. और मैने दीए इसलिये हमारे बाजूवालेने भी दिए. नेबर टेडंसी1 पडोसीने गाडी ली ना फिर मैभी लेता हू ऐसे. उसके लिये भलेही कर्जमें डूबने नौबत क्योंना आये. थोडी देर में एक और भिखारी "मेरी मां बिमार है' कहते हूए हाथ फैलाने लगा. उसको किसीनेभी पैसे नही दिए इसलिए मैनेभी नही दिए. और मैने नही दिये इसलिये हमारे बाजुवालेने भी नही दिये वह जाता नही की उसके पिछे वे तालियां बजाने वाले आ गए .. तृतीय पंथी उनको पैसे ना देने की किसकी हिम्मत. सब लोगोंने चुपचाप उसे पैसे दे दिए. नही दोगे तो सिधा जेब मे हाथ डालकर पैसे लेने की उनकी मजाल. वैसे पैसे निकालने के लिए वे सामनेवाला आदमी देखकर अलग अलग नुस्खे अपनाते है.

" ए चिकने ...दे ना' किसीके गाल को हाथ लगायेंगे. या फिर " ए भिडू ...दे ना' कहकर कही और हाथ लगायेंगे.

" यहां अगर जादा देर बैठे तो थोडी देर बाद कही हमें भीख मांगने की नौबत ना आ जाए' मैने मेरे पत्नीसे उसके सामने हाथ फैलाने की चेष्टा करते हूए मजाक में कहां.

ऐसे मजाक की हवा निकालकर उसे कैसे भद्दा बनाना तो कोई मेरे बिवीसे सिखे... अपने गंभीर चेहरे को और गंभीर बनाते हूए झट से उसने अपने पर्स से अठन्नी निकाली और सब बैठे हूए लोगोंके सामने मेरे फैलाए हूए हाथपर थमा दी.

भिखारीयोंसे बचनेके लिए मै बगल के एक स्टॉल पर गया. वहां सामने एक शायद किसी खाने के चीज का पाकीट लटका हूवा था. उस पर लिखा हूवा था "अब पहले से बढिया स्वाद में'. स्वाद और वह भी बढीयां. मेरे मुंह मे पाणी आ गया . मैने पुछा "क्या है?'. उसने रुखे स्वर में कहां "कुत्ते का बिस्कीट' मेरे मुंह का पाणी उल्टे पांव लौट गया . कुत्ते का बिस्कुट ... अब पहले से बढिया स्वाद में. अब इसके पहले के स्वाद में और अब के स्वाद में फर्क है या नही ये देखनेके लिये या तो आदमी को कुत्ता बनना पडेगा. ... या फिर कुत्तेको पढना लिखना सिखना पडेगा

" अजी सुनीये ... गाडी आ गई... नही तो हमेशा की तरह...' श्रीमतीजीकी आवाज आया. उसने आगे भी कुछ कहां.. वह मुझे सुनाई दिया नही ऐसा नही... बल्की वह मैने जानबुझकर सुना नही ... हमेशा की तरह... आदत के अनुसार.

.... to be contd

Labels : aha jokes, clean jokes, funny jokes, funny photo, funny photos, games, games and jokes, Haryanavi Humour, Hilarious jokes, india humor, kids jokes, laugh and smile, marriage jokes, political jokes

.

Previous Joke Next Joke

Wednesday, January 16, 2008

मार्केटिंग - कॉमेडी कथाकथन भाग-१/४ (पोस्ट-12)

Previous Joke Next Joke

.

बीवी के साथ मार्केटिंग को जाना एक सुखद अनुभव है. .. मतलब अपने अपने बिबी के साथ. इस बात से कोई भी इन्कार नही कर सकता ... खासकर अगर उनके बीवी के सामने पुछा जाए तो.

मै और मेरी बीवी मार्केटिंग के लिए गए थे. जैसे की हमेशा होता है वह आगे चल रही थी और मै पिछे चल रहा था. कुछ लेने लायक है क्या यह मै देख रहा था. एक दुकान पर लगे एक इश्तेहार ने मेरा ध्यान खिंच लिया.

लिखा था, " लहसून छिलने का यंत्र.... सिर्फ दस रुपए में ' "यंत्र' इस शब्द ने मेरी उत्सुकता बढाई ... वैसेतो आजकल किसी भी बात का यंत्र मील जाता है... दुकानमालीक के पास गया मैने उसे वह "यंत्र' दिखाने के लिए कहा. देखता हूं तो 6 इंच लंबी और 3 इंच परिघ की एक रबड की ट्यूब थी. मै उसे उलट पुलटकर देखने लगा. असल मे मै उस यंत्र को शुरु करने का बटन ढूंढ रहा था.

"अजीब बेवकुफ है ...' इस अविर्भाव मे उस दुकानमालीक ने वह ट्यूब मेरे हाथ से छीन लिया. अब वह दुकानमालीक उस यंत्र का मुझे डेमॉस्ट्रेशन देने लगा. उसने एक लहसुन ट्यूब मे डाला और वह उस ट्यूब को जोर जोर से रगडने लगा. अगर इतने जोर से रगडो तो साला लहसून छीलने के बजाय अपना हाथ ना छील जाये और इतने जोर से उस ट्यूब को रगडने की बजाय अगर डायरेक्ट लहसून को रगडो तो इतनी देर में कम से कम आधा किलो लहसून छील जायेगा अब "अजीब बेवकुफ है ...' इस अविर्भाव मे देखने की मेरी बारी थी.

इतनेमें " अजी देखिए तो... कान के झुमके ... कैसे लग रहे है ' बाजू के दुकानसे मेरी पत्नीने कहा. मै वहा गया. मै थोडा अलर्ट होगया क्योंकी अब उस दुकानमालीक के मार्केटिंग स्कीलसे मेरी मार्केटिंग स्कीलका सच्चा इम्तेहान था. मैने उस दुकानमालीकसे दाम पुछा

" दो सौ रुपए... आप है इसलिए देडसोमे देंगे' उसने कहा.

" आप है इसलिए ...' मैने उसे घुरकर देखा. मै उसे नही जानता था. हो सकता है वह मुझे जानता हो...

शायद उसने मेरे मन की बात भांप ली.

" पिछले बार भी मैने आपसे जादा पैसे नही लिए थे' उसने कहा.

वह मुझे कितना जानता है यह मै समझ गया - क्योंकी मै पहली बार उसके दुकान मे गया था.

लेकिन उसने वह बात इतने कॉन्फीडंस से कही थी की उसे कुछ कहने की बजाय मैने ही अपने आपको को समझाया की शायद गलतीसे वह मुझे कोई और समझ रहा हो. बात झुमकोंकी बोलू तो वह झुमके खरीदने की मेरी बिलकुल इच्छा नही थी. अब तक के अनुभवसे मै अपनी बीवीकी मानसीकता अच्छी तरह से समझ चुका था. मै अगर झुमकोंको खराब कहूं तो वह उसे जरुर खरीद लेगी. इसलिए मैने कहा " बहुतअच्छे है ... कसमसे आपको बहुत जचेंगे'

" ठीक है ... मेरी बहन के लिए भी एक पेअर पॅक कर देना' उसने मुझे पैसे चुकाने के लिए इशारा करते हूए कहा.

अब करने लायक कुछ नही बचा था. चुपचाप पैसे निकालकर मैने दुकानमालीकको दिए. शायद मेरे बिवी की मानसीकता पहचाननेमें मैने देर लगा दी थी. उसकी मानसीकता पहचानके पहले उसनेही मेरी मानसीकता पहचान ली थी.

... to be contd

Labels : cartoons, Comedy katha, comedy literature, comedy story, gags, hindi comedy katha, hindi comedy literature, hindi comedy story, hindi gags, hindi humor, hindi jokes, katha kathan, standing comedy

.

Previous Joke Next Joke

Tuesday, January 15, 2008

केशभुषा कॉमेडी कार्टून पोस्ट -11

Previous Joke Next Joke

.



मैं एयर फोर्स से हूँ


मैं नेवी से हूँ


मैं हेड क्वार्टर से हूँ

मैं राश्ट्र्पति भवन से हूँ


मैं तिहार से हूँ


और मैं बिहार से हूँ









Labels : all sort of comedy, bollywood, comedy cartoon, comedy cartoons, comedy flicks, comedy video, hangama, humor literature, humor stories, idia, inda, India comedy flicks, jkes, joke, jokes, mumbai, ndia, pathan jokes

.

Previous Joke Next Joke

Monday, January 14, 2008

Hindi Jokes - सरदारजी की नजर

Previous Joke Next Joke

.

एक सरदारजी आंखोके डाक्टर के पास गए
सरदारजी - डाक्टर मुझे एक तकलीफ है
डाक्टर ने सरदार जी के भरी भरकम शारीर को ऊपर से निचे तक घुर कर देखा और पूछा -
डाक्टर - क्या तकलीफ है भइये
सरदारजी - डाक्टर मेरी नजर बहुत खराब हो गई है ... मुझे जमिन्पर मेरे पैर भी नजर नही आते
डाक्टर - कैसे दिखाई देंगे भइये ... तेरे अन्खोंके और पैरोके बीचमे तेरी ये भरी भरकम तोंद जो आवे है



Labels: best jokes, best new jokes, Daily Jokes, funny jokes, Funny Jokes and Humor, holiday jokes, india jokes, indian jokes, jop jokes 4u, latest jokes, list of jokes, new jokes, Santabanta jokes, top jokes

.

Previous Joke Next Joke

Sunday, January 13, 2008

सरदारजीने पढा उपन्यास Post 10

Previous Joke Next Joke

.

एक सरदारजी लायब्ररीमे गया. एक उपन्यास लेकर लायब्ररीमें कोनेमे बैठकर दिनभर पढता रहा. जब किताब पढना खतम हुवा तब लायब्ररीयनके सामने किताब पटकते हूए सरदारजीने कहा - "" यह क्या बकवास उपन्यास रखते हो लायब्ररीमे. इसमें इतने ढेर सारे कॅरॅक्टर है और कहानी का कुछ अता पता ही नही. ''

लायब्ररीयनने किताब की तरफ देखकर कहां "" अच्छा तो जनाब आपके पास थी यह किताब... तो भी मै बोलू ईतनी देरसे टेलिफोन डिरेक्टरी कहां गुम हो गई है...''

yek saradaarajii laayabrariime gayaa. yek upanyaas lekar laayabrariimen koneme baithakar dinabhar padataa rahaa. jab kitaab padanaa khatam huvaa tab laayabrariiyanake saamane kitaab patakate hooye saradaarajiine kahaa - "" yah kyaa bakavaas upanyaas rakhate ho laayabrariime. isamen itane der saare koroktar hai aur kahaanii kaa kuchh ataa pataa hii nahii. ''

laayabrariiyanane kitaab kii taraph dekhakar kahaan "" achchhaa to janaab aapake paas thii yah kitaab... to bhii mai boloo eetanii derase teliphon direktarii kahaan gum ho gaee hai...''

Labels : chennai india, comedy films, comedy ka badshaha, comedy king, comedy the movie, comedy tv, hbo comedy, india clips, india comic, india hollywood, india television, india tv series, pune india, sardar comedy

.

Previous Joke Next Joke

Wednesday, January 9, 2008

सरदारजी की तरकीब - post 9

Previous Joke Next Joke

.

एक सरदारजी एक ऑब्जेक्टीव टाईप टेस्ट दे रहा था. उस टेस्टके जवाब एक ओएमआर मशीनसे चेक किये जाने थे. इसलिए सबको अपने जवाब उनको दिए गए ऍन्सर पेपर पर सही गोल को काला कर देने थे. तो उस सरदारने एक तरकिब लडाई. उसको उसके सामने बैठे एक प्रतियोगीके जवाब कॉपी करने थे. उसने अपने ऍन्सर पेपर पर जहां जहां गोल थे सब जगह छेद किये ताकी वह जवाब चेक करनेवाली ओएमआर मशीन जब उसका पेपर चेक करे तो जवाब उस छेदमेंसे निचेके ऍन्सर पेपरके पढे. ....

yek saradaarajii yek oebjektiiv taaeep test de rahaa thaa. us testake javaab yek oyemaaar mashiinase chek kiye jaane the. isaliye sabako apane javaab unako diye gaye eunsar pepar par sahii gol ko kaalaa kar dene the. to us saradaarane yek tarakib ladaaee. usako usake saamane baithe yek pratiyogiike javaab kopii karane the. usane apane eunsar pepar par jahaan jahaan gol the sab jagah chhed kiye taakii vah javaab chek karanevaalii oyemaaar mashiin jab usakaa pepar chek kare to javaab us chhedamense nicheke eunsar peparake pade. ....


Labels : bangalore india, comedy comics, comedy improv, comedy movie, comedy roast, comedy routines, comedy tv series, india entertainment, india video clips, mumbai india, new delhi india, russell comedy

.

Previous Joke Next Joke

Tuesday, January 8, 2008

सरदारजी का इंटरव्ह्यू

Previous Joke Next Joke

.

इंटरव्ह्यू लेनेवाला सरदारसे - एक सरदारजी नारीयलके पेढसे सरपर नारीयल गिरनेसे मर गया ... सही या गलत?
सरदारजी - सही
इंटरव्ह्यू लेनेवाला - गलत क्योंकी ...सरदार तो सरपर पगडी पहनता है..
सरदारजी - नही सर सरदारजी पेढके निचे सो रहा था.
इंटरव्ह्यू लेनेवाला - नारीयलके पेढके निचे कभी कोई सोता है...
सरदारजी - सर सरदार सो सकता है...

intaravhyoo lenevaalaa saradaarase - yek saradaarajii naariiyalake pedase sarapar naariiyal giranese mar gayaa ... sahii yaa galat?
saradaarajii - sahii
intaravhyoo lenevaalaa - galat kyonkii ...saradaar to sarapar pagadii pahanataa hai..
saradaarajii - nahii sar saradaarajii pedake niche so rahaa thaa.
intaravhyoo lenevaalaa - naariiyalake pedake niche kabhii koee sotaa hai...
saradaarajii - sar saradaar so sakataa hai...

Labels : bombay india, comedy clips, comedy video clips, hyderabad comedy, india actors, india films, india quotes, india stars, india wallpaper, movie review comedy

.

Previous Joke Next Joke

Monday, January 7, 2008

सरदारजी का खत - Post 7 - Sardarji's letter

Previous Joke Next Joke

.

एक सरदारजीने अपने रिस्तेदारको खत लिखा और गलतीसे To के जगह रिस्तेदारका नाम और पते की बजाय अपना नाम और पता लिखा और From की जगह अपना नाम और पते के बजाय उस रिस्तेदार का नाम और पता लिखा. पहली डाकसे खत जाना चाहिए इसलिए सरदारजीने सुबह सुबह वह खत पोस्टमें डाला. दोपहर को वही खत लेकर पोस्टमन सरदारजीके घर पहूंचा. खत लेकर सरदारजीने वह खत उलट पुलटकर देखा और पोस्टमन से कहा "" भाई कमाल होगया... तुम्हारा पोस्ट डीपार्टमेंट कबसे इतना प्राम्प्ट हो गया... सुबह खत भेजा और दोपहरमें जवाब भी आया''

yek saradaarajiine apane ristedaarako khat likhaa aur galatiise To ke jagah ristedaarakaa naam aur pate kii bajaay apanaa naam aur pataa likhaa aur From kii jagah apanaa naam aur pate ke bajaay us ristedaar kaa naam aur pataa likhaa. pahalii daakase khat jaanaa chaahiye isaliye saradaarajiine subah subah vah khat postamen daalaa. dopahar ko vahii khat lekar postaman saradaarajiike ghar pahoonchaa. khat lekar saradaarajiine vah khat ulat pulatakar dekhaa aur postaman se kahaa "" bhaaee kamaal hogayaa... tumhaaraa post diipaartament kabase itanaa praampt ho gayaa... subah khat bhejaa aur dopaharamen javaab bhii aayaa''

Labels : bollywood comedy, comedy blog, hindi blog, laughter challenge, marathi blog, mumbai, pune, saradar, saradar jokes

.

Previous Joke Next Joke

Saturday, January 5, 2008

सरदारजी का बिझीनेस - Sardarji's bussiness

Previous Joke Next Joke

.

एक सरदारजीको बिझीनेस शुरु करना था. उसने क्या बिझीनेस किया जाए इस बारेमे बहुत संशोधन किया. और आखीरमें पंजाबमें अपने गांवमें एक सलूनका दुकान खोला.

yek saradaarajiiko bijhiines shuru karanaa thaa. usane kyaa bijhiines kiyaa jaaye is baareme bahut sanshodhan kiyaa. aur aakhiiramen panjaabamen apane gaanvamen yek saloonakaa dukaan kholaa.



Labels : comedy jokes, comedy movies, comedy quotes, hindi comedy, india bollywood, india comics, india jokes, india movies, india news, india tv, india tv show, stand up comedy, telugu comedy

.

Previous Joke Next Joke

Thursday, January 3, 2008

दूर से देखा तो ...

Previous Joke Next Joke

.

दूर से देखा तो एक सुंदरी के बाल लहरा रहे थे

पास जाकर देखा तो सरदारजी नहा रहे थे.



Labels : comedy circus india, comedy ka badshah hasega india, india comedy show, jokes, sardar jokes

.

Previous Joke Next Joke

POPULAR POSTS ======>

Custom Search

इस साईट पर आपभी चुटकुले भेज सकते है

  Hindi Jokes Feed

Enter your email address to SUBSCRIBE to Hindi Jokes:

Social Network

आप इस अंतर्जाल पर आनेवाले

वे आगंतुक है

Marathi Subscribers

Hindi Subscribers

About Hindi

Hindi is the name given to an Indo-Aryan language, or a dialect continuum of languages, spoken in northern and central India (the "Hindi belt")Native speakers of Hindi dialects between them account for 41% of the Indian population (2001 Indian census). That is the reason because of which the entertainment industry in India mainly use Hindi. And the idustry which is also called as bollywood is the second largest industry producing movies in the world. As defined in the Constitution, Hindi is the official language of India and is one of the 22 scheduled languages specified in the Eighth Schedule to the Constitution. Official Hindi is often described as Modern Standard Hindi, which is used, along with English, for administration of the central government. Standard Hindi is a sanskritised register derived from the khari boli dialect. Urdu is a different, persianised, register of the same dialect. Taken together, these registers are historically also known as Hindustani.